स्वयं एक अद्भुत गायक रहे सचिन देव बर्मन का संगीत एक खिलखिलाकर दौडती हुई सरिता की तरह कुछ इस तरह बहता कि उनका गीत हर दिल में गहरा उतर जाता था। सुनिए -

⋇ संगीत:

⋇ गीत:

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  अपने पसंदीदा गानों का आनंद लें!

  एक कसे हुए कलाकार की यह पहचान होती है कि वह स्वयं संवेदनशील होता है और हर नयी चीज सिखने के लिए आतुर रहता है। सचिन देव बर्मन असम और त्रिपुरा के जंगलों में कई दिनों तक घूमे जहाँ पर उनको बंगाल व आसपास के लोक संगीत के विषय में नई नई जानकारी प्राप्त हुई। उनके संगीत में हमें शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, रविंद्र संगीत के साथ साथ पाश्च्यात्य संगीत का इस खूबी के साथ प्रयोग किया हुआ होता है कि सुननेवाले का रोम रोम खुशी से झूम उठता है। संगीत सचिनदा की रगों में इस कदर दौडता था की अपने अंतिम दिनों में जब वे अस्पताल में एडमिट थे, वहाँ भी संगीत की ही चर्चा करते थे। सचिनदा के साथ फिल्म संगीत में एक 'बर्मन युग' की शुरुवात हुई जिसमे हर प्रकार के गीत हिट हुए। इन सुपरहिट गीतों में कई गीत तो ऐसे थे जिनकी धुनें पहले बनी और गीत बाद में स्वरों में बांधे गये। यह नूतन प्रयोग करनेवाले सचिन देव बर्मन प्रथम संगीतकार थे।

  सचिन देव बर्मन के सहजसुंदर धुनों से सजी कई लोकप्रिय फिल्में हैं - आराधना, अभिमान, गाइड, काला बाजार, लाजवंती, बंदिनी, तेरे घर के सामने, प्यासा आदि।

  Sachin Dev Burman was introduced to music early through his family, with his father being a talented musician. His musical journey began in Bengali cinema, but his true breakthrough came when he entered Bollywood in the 1950s. His early compositions were recognized for their unique style, and his collaborations with lyricist Shailendra and playback singer Mohammad Rafi brought him widespread recognition.

 S. D. Burman’s music reached new heights in the 1960s, with collaborations that defined the golden age of Hindi cinema. His work with director Guru Dutt on Pyaasa (1957) and Kagaz Ke Phool (1959) produced some of the most emotionally poignant and iconic songs of the era. The melancholic “Jaane Woh Kaise Log The” and the haunting “Waqt Ne Kiya Kya Haseen Sitam” showcased Burman’s ability to craft melodies that complemented the film’s themes. His work in Aradhana (1969), featuring memorable songs like “Mere Sapno Ki Rani” and “Roop Tera Mastana,” became anthems of youth, solidifying his legacy as one of Bollywood's greatest composers.

 S. D. Burman’s hallmark was his ability to fuse classical and contemporary elements, exemplified in his compositions for Guide (1965), which featured timeless songs like “Aaj Phir Jeene Ki Tamanna Hai” and “Tere Mere Sapne.” His music was noted for its emotional depth and its perfect orchestration. His legacy remains a significant influence on future generations of music directors, with his songs continuing to be cherished worldwide.


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