१९९०-९९ का दशक हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में एक सुखद मोड लेकर आया। अस्सी के दशक के शोर और डिस्को की चमक-धमक से ऊबकर जनमानस ने एक बार फिर कोमलता और भावना की माँग उठाई। और यह माँग पूरी हुई आशिकी और मैंने प्यार किया जैसी विशाल रोमांटिक धुनों से, जिन्होंने प्रेम के उस भोलेपन को लौटाया जो कुछ वर्षों के लिए खो गया था।
इस दशक में संगीकारों ने तालों और मशीनों के बजाय आर्केस्ट्रा, कविता और भावनात्मक गहराई पर अधिक ध्यान दिया। राम-लक्ष्मण, नदीम-श्रवण और जतिन-ललित ने मिलकर उस समृद्ध, मधुर रोमांटिकता को पुनर्जीवित किया, जो पिछले दशकों की पहचान थी। उनके गीत उस जमाने की चर्चित फिल्मों के साथ इतने सटीक तालमेल में थे, मानो संगीत और कथा एक ही साँस में साँस ले रहे हों। इस दशक का संगीत साफ, अधिक परतदार और हर आयु वर्ग के लिए सहज आकर्षक बन गया।
रिकॉर्डिंग तकनीक ने इस दशक में नई ऊँचाइयाँ छू लीं। टेलीविजन चैनलों पर आने वाले प्रचार-संगीत वीडियो ने गीतों को फिल्म से अलग भी अपनी पहचान दिलाई। अब गाने सिर्फ सिनेमाघरों तक सीमित नहीं रहे - वे हर घर की रेडियो और हर गली के टीवी पर छा गए। और इन गीतों की जान थीं सुर की वे दो बहनें - लता और आशा - जिन्होंने अपनी मोहिनी आवाजों से पाँच दशकों से अधिक समय तक इस दुनिया को आनंदित किया था।
इस दशक का सबसे बडा और अप्रतिम मोड आया १९९२ में, जब ए. आर. रहमान ने 'रोजा' से अपने पदार्पण के साथ हिंदी संगीत की नींव हिला दी। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक उत्पादन, कर्नाटक शास्त्रीय संगीत की गहराई, विश्व संगीत की बनावट और पॉप की सादगी को ऐसे अनूठे ढंग से मिलाया, जैसे कोई जादूगर अपनी कला दिखाता है। उनके संगीत ने यह साबित कर दिया कि शास्त्रीयता और आधुनिकता एक साथ चल सकती हैं, बिना एक दूसरे का अपमान किए।
उदित नारायण, कुमार सानु और अलका याज्ञिक ने इस दशक के आकाश पर अपना परचम लहराया। उनके मीठे, मखमली और प्रेमपूर्ण गीत हर किशोर की जुबान पर रहते थे, और हर प्रेमी के दिल की धडकन बन गए थे। इस दशक का अंत सूफी, लोक और पॉप के एक परिष्कृत मिश्रण के साथ हुआ, जिसने संगीत को और अधिक व्यापक और गहरा बना दिया।
सन २००० के पूर्व के इस दशक के सिनेमा को कुछ अविस्मरणीय फिल्मों ने परिभाषित किया, जैसे: दिल, घायल, आशिकी, साजन, सडक, दिल है कि मानता नहीं, फूल और काँटे, बेटा, जो जीता वही सिकंदर, बाजीगर, डर, हम आपके हैं कौन, अंदाज अपना अपना, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, करन अर्जुन, रंगीला, दिल तो पागल है, बॉर्डर, कुछ कुछ होता है, हम दिल दे चुके सनम — ये वे फिल्में हैं जिनके गीत आज भी पीढ़ियों के दिलों में बसे हुए हैं।
• फिल्म संगीत के यादगार तराने :




















